अचूक भविष्य कथन हेतु ज्योतिषियों को नित्य साधना आवश्यक !

अचूक भविष्य कथन हेतु ज्योतिषियों को नित्य साधना आवश्यक !

चंडीगढ – उपासना (साधना) करनेवाले ज्योतिषियों के भविष्यकथन में जो अचूकता होती है, वह अचूकता पुस्तकी पंडित ज्योतिषियों के भविष्यकथन में नहीं होती । उनके भविष्यकथन संदिग्ध होते हैं । अनेक बार वे गलत भी होते हैं । इसका कारण है कि पुस्तकी पंडित ज्योतिषि केवल प्रारब्ध कर्म के अनुसार भविष्य बता पाते हैं; परंतु साधना करनेवाले ज्योतिषि क्रियमाण कर्म के अनुसार भी भविष्य बता पाते हैं । केवल पुस्तकी जानकारी के आधार पर बताया हुआ भविष्य अचूक नहीं होता । उपासना (साधना) करनेवाले ज्योतिषियों की भविष्यवाणियां यथातथ्य सत्य होती पाई जाती हैं, ऐसा प्रतिपादन महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की श्रीमती संदीप कौर मुंजाल ने किया । ‘श्रीमुख ज्योतिष संस्थान’ ने 22 से 24 मार्च की अवधि में चंडीगढ में ‘अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन’ आयोजित किया था । उसमें श्रीमती मुंजाल ने 23 मार्च को ‘अचूक भविष्य कथन के लिए नित्य साधना करना आवश्यक !’, इस विषय पर ज्योतिषियों को संबोधित किया । महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शन में ज्योतिष फलित विशारद श्रीमती प्राजक्ता जोशी ने यह विषय लिखा है ।
श्रीमती मुंजाल ने आगे बताया कि, जैसे जैसे साधना बढती है, वैसे वैसे मन की एकाग्रता बढती है तथा ईश्‍वर की कृपा से अर्थात ईश्‍वरेच्छा से अर्थात ईश्‍वर से अंशात्मक एकरूप होने से ज्योतिषि को अचूक भविष्य कथन कर पाना संभव होता है । इसीलिए संत ज्योतिषशास्त्र का अध्ययन किए बिना ही अचूक भविष्य बता पाते हैं । साधना में हुई प्रगति के अनुसार धीरे धीरे अचूकता बढती है । महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने वर्ष 1991 में बताया था कि अच्छे ज्योतिषि बुद्धि से 30 प्रतिशत तथा साधना के कारण भीतर से सूझने से 70 प्रतिशत भविष्य बता सकते हैं ।
‘‘भविष्य में बताए अनुसार सब होने वाला है, तो प्रयत्न क्यों करें ?’, ऐसा प्रश्‍न कुछ लोगों के मन में उत्पन्न होता है । उस विषय में श्रीमती मुंजाल बोलीं कि, फलज्योतिष एक शास्त्र है । इस संदर्भ में आगे दिए गए सूत्र ध्यान में लें
अ. मानव जीवन की 65 प्रतिशत घटनाएं प्रारब्धानुसार होती हैं, जबकि 35 प्रतिशत घटनाएं क्रियमाण कर्मानुसार होती हैं । ‘कौनसी घटना प्रारब्धानुसार होगी ? और कौनसी घटना क्रियमाण कर्मानुसार होगी ?’, यह हमें समझ में नहीं आता । इसलिए प्रयास करना उचित होता है ।
आ. प्रारब्धानुसार होनेवाली घटनाओं में से 30 प्रतिशत घटनाएं, उदा. मृत्यु (महामृत्युयोग) अटल होती है । कितने भी प्रयास करने पर उन्हें टाला नहीं जा सकता; परंतु ‘महामृत्युयोग है अथवा नहीं’, यह हम समझ नहीं पाते । इसलिए प्रयास करना उचित होता है । शेष 70 प्रतिशत घटनाओं को उचित साधना से टाला जा सकता है ।
श्रीमती मुंजाल ने विषय का समापन करते हुए कहा कि, ज्योतिषी केवल शास्त्र बता सकते है; परंतु वे किसी एक को बचा नहीं सकते । संत आध्यात्मिक उपाय बताकर उन्हें होने वाली पीडा की तीव्रता निश्‍चित ही कम कर सकते हैं ।
सुन्दर कुमार ( प्रधान सम्पादक )

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