कश्मीर का वास्तविक विलीनीकरण !

कश्मीर का वास्तविक विलीनीकरण !

स्वतंत्रता के पश्‍चात महाराजा हरिसिंह ने भारत में विलीन होने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उसके बाद भी जम्मू-कश्मीर केवल कागजों में ही भारत का था । इस राज्य के जम्मू और लद्दाख के क्षेत्र तो भारत से राष्ट्रीय और सांस्कृतिक दृष्टि से जुडे थे; परंतु कश्मीर की घाटी के कुछ जिले निरंतर भारतविरोधी विष उगल रहे थे । अनुच्छेद ३७० के कारण पिछले ७१ वर्षों से कश्मीर का भारत से अलग अस्तित्व बना हुआ था । यह अस्तित्व केवल अलग ही नहीं, अपितु भारतविरोधी भी था । अनुच्छेद ३७० का सबसे अधिक प्रहार कश्मीरी हिन्दुओं पर हुआ । भारतविरोधी कार्यवाहियों को बल देनेवाली यह धारा हटाने के लिए गत अनेक वर्षों से देशभर के राष्ट्रप्रेमी संगठन और नागरिक आवाज उठा रहे थे । केंद्र सरकार ने अनुच्छेद ३७० निरस्त कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया है तथा देशभक्तों की मांग के साथ न्याय किया है । इसके लिए केंद्रसरकार अभिनंदन की पात्र है । इस निमित्त कश्मीर का सच्चे अर्थों में भारत में विलीनीकरण होना आरंभ हुआ है । और कश्मीर का खरे अर्थों से भारत में विलीनीकरण तब पूर्ण होगा,
जब कश्मीर से देशद्रोही, जिहादी शक्तियों समूल नष्ट होंगी, 30 वर्षों से अपनी ही भूमि पर विस्थापितों का जीवन जीनेवाले कश्मीरी हिन्दुओं का सम्मान से पुनर्वसन होगा, जब वहां के चौक-चौक में अभिमान से वन्दे मातरम् का जयघोष होगा, तिरंगा फहरायेगा और वही हिन्दू राष्ट्र स्थापना का उदय होगा ।

कांग्रेस का पाप !
जवाहरलाल नेहरू ने शेख अब्दुल्ला से संबंध सुधारने के लिए कश्मीर के विषय में अनेक देश विरोधी निर्णय लिए । कश्मीर का विषय संयुक्त राष्ट्रसंघ में ले जाकर उन्होंने ‘कश्मीर का घाव सदैव हरा रहने का प्रयास किया । वास्तविक अनुच्छेद ३७० संविधान में अंतर्भूत करने के लिए डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का विरोध था; परंतु संविधान की प्रशंसा करनेवाली मंडली ही संविधान के मूल ढांचे के असंगत अनुच्छेद ३७० के समर्थन के लिये आज मैदान में उतर आई है । उनमें से किसी ने भी तात्त्विक सूत्र न रखकर अनुच्छेद ३७० को हाथ लगाओगे, तो जल जाओगे’, ऐसे भडकाऊ बयान दिये हैं । इसी अनुच्छेद के कारण ही कश्मीर का विकास रुका हुआ था । जम्मू-कश्मीर के बाहर रहनेवाला कोई भी भारतीय व्यक्ति वहां भूमि नहीं खरीद सकता था । देश के कानून, सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं थे । विदेश व्यवहार, परिवहन और सुरक्षा इन तीन विभागों के अतिरिक्त भारत सरकार को जम्मू-कश्मीर के अन्य विषय में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं थी । यह सभी रुकावटें अब दूर होंगी । कश्मीर में जो जिहादी शक्तियां हिन्दुओं को और हिन्दुओं के श्रद्धास्थानों को नष्ट कर रही थीं, उनपर नियंत्रण होगा । कश्यप ऋषि की भूमि खरे अर्थों में पुनः तपोभूमि बनेगी । इस दिशा मे और आगे कार्य को बढाते हुए अब भारत को पाकिस्तान द्वारा कब्जाये कश्मीर के साथ ही पाकिस्तान पर भी छा जाना चाहिए, ऐसी राष्ट्रभक्तों की भावना है ।

सुरक्षित भारत !
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में नवभारत के निर्माण का संकल्प किया है । उन्होंने कहा है कि देश की सुरक्षा ही सर्वोच्च प्राथमिकता है । इस दृष्टि से इस घटना का महत्त्व अधिक हो जाता है । अब कश्मीर घाटी का जिहादी चेहरा हटाकर उसे भारतीय बनाने के लिए सरकार को कुछ ठोस कार्य तत्परता से करने चाहिए । अबतक कश्मीर में जिन जिन सरकारों ने राज्य किया, उन्होंने वहां केवल और केवल भारतद्वेष फैलाने के ही प्रयास किया । वहां की हिन्दू संस्कृति के चिन्ह नष्ट किए । उन्हें फिर से जीवित करने को सरकार प्राथमिकता दे । मंदिरों का जीर्णोद्धार और हिन्दुओं के श्रद्धास्थानों का संवर्धन करे । कश्मीरी हिन्दुओं को फिर से कश्मीर में सम्मान से बसाये । उस राज्य में बसे रोहिंग्या मुसलमानों को भारत से बाहर खदेडे । जम्मू-कश्मीर राज्य का ‘विशेष राज्य’ का दर्जा हटाकर सरकार ने एक सकारात्मक और निर्णायक कदम उठाया है । ऐसे कार्य में प्रत्येक राष्ट्रप्रेमी संगठन और व्यक्ति सरकार के पक्ष में रहेगा । समर्थ भारत की निर्मिति के लिए सरकार ऐसे ही ठोस कदम उठाकर राष्ट्रप्रेम के उफान में देशद्रोही शक्तियों का अंत करें, यही अपेक्षा और उसके लिए शुभकामनाएं !
सुरेश मुंजाल
हिंदू जनजागृति समिति

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