क्या इल्युमिनाटी भ्रष्ट लोगों की पनाहगार है ?

संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व के कल्याण हेतु बना देशों का संगठन नहीं है अपितु इल्युमिनाटी का अभिरक्षा विभाग (पुलिस विभाग) है ताकि जो भी इनके द्वारा निर्णीत आदेशों का विरोध करे तत्क्षण उसके विरूद्ध सैनिक कार्यवाही की जा सके। न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में इल्युमिनाटी के उपासना स्थल का होना कोई संयोग नहीं है यह है अविश्वसनीय विधियों से विश्व को संचालित करना।

सामाजवाद एक ऐसा राजनीतिक तन्त्र है जिसके द्वारा सभी मनुष्यों को दास बनाया जाता है। और लाल रंग का बैनर इसके संकेतक है और ये वास्तव में रॉथचाईल्ड्स का पारिवारिक बैनर भी है। यह परिवार 1800ईस्वी से अस्तित्व में है। इस परिवार के द्वारा समाजवाद को प्रोत्साहित किया गया है। मियर आमचेल रॉथचाइल्ड नामक व्यक्ति इसका प्रथम संस्थापक व प्रथम व्यक्ति था इसका समय1743-1812 तक था। इस परिवार का अपना बैंक है जो एफ यू केन्द्रीय बैंक के नाम से जाना जाता है। कुछ लोग ही एक सत्य जानते हैं कि यूरोप के अधिकतर बैंकोंकी संस्थापना इसी परिवार के द्वारा की गई हैं तथा अद्यापि वे बैंक इस परिवार के स्वामित्व में ही हैं। केन्द्रीय बैंक आने वाले अत्याचारी समाजवाद की आधारभूत संकल्पना है।

रॉथचाईल्ड परिवार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के परिप्रेक्ष्य में परमाणवीय परियोजनाओं के विरेाध में आन्दोलनो को पैसा दिया जाता है क्येांकि ये परिवार पूरे विश्वमें एक ही ऊर्जा उत्पादन ईकाई लगाना चाहता है जो कि उसके नाम से हो। अत: प्रत्येक राष्ट्र की स्वतन्त्रता सम्प्रभूता ये सब बातें इल्युमिनाटी के विचारधारा के विपरीत है। जब ऊर्जा के जैविक संसाधन यथा पैट्रोल समाप्त हो जायेगा तब पूरा विश्व परमाणवीय ऊर्जा पर आश्रित होगा तब तक रॉथचाईल्ड परिवार विश्व का 80प्रतिशत तक का यूरेनियम खरीद चुका होगा। इस प्रकार ये ऊर्जा के माध्यम से पूरे विश्व को अपने अधिकार में कर लेंगे। परिणाम स्वरूप जो भी राष्ट्र इनके हाथ में एक बार आ जायेगा वह कभी भी मुक्त नहीं होगा।

ईसा विरोधी

एक नया समूह खड़ा हुआ है जो वास्तव में हैं तो ईसाई किन्तु अब ये अपने धर्म व दर्शन के विरोध में हैं इस समूह का नाम मैत्रेयी बुद्ध। इसका प्रचार—प्रसार 70के दशक से हेा रहा है। ऐसा दिखाया जायेगा कि इसके सन्दर्भ में बाइबिल में लिखा है जोकि वास्तव में एक शान्तिदूत होगा वस्तुत: एक झूठा मसीहा के रूप में दिखाया जायेगा। किन्त इसके प्रभाव से जैसे ही विश्वक के बहुत लोग अपने नये धर्म को स्वीकार करेंगे वैसे ही ये एक तानाशाह बन जायेगा।

इसे कई बार जार्ज बुश के साथ भी देखा गया है।

किन्तु यहाँ लेखक की बातों में सत्यता का अभाव दिखाई देता हैं सम्भवत: समय के साथ इल्युमिनाटी ने अपना मार्ग बदल दिया हो।

किन्तु इनका ये मानना है कि किसी भी प्रकार एक ही सरकार के द्वारा सम्पूर्ण विश्व का चलाया जाय इसके लिये अलौकिक शक्तियों का आह्वान किया जाना चाहिये तथा ये मैत्रेयी बुद्ध सहस्रों वर्षों से एक जाग्रत अथवा चेतन व्यक्ति हैं इसके द्वारा ही इल्युमिनाटी अपना उल्लू सीधा करना चाहती है।

यहाँ मैं लेखक की मूल विचारों व लेखन से हटकर थोड़े अपने विचार रखना चाहता हूँ कि शंकराचार्य के समय में पूरे भारत में बौद्ध धर्म का प्रभाव था तथा इन्हें वाममार्गी कहा गया था। बाणभट्ट अपनी आत्मकथा में इनके सन्दर्भ में लिखते है कि”आजकल बडे आश्चर्य चकित करने वाले बौद्ध उपासरे बन रहे हैं जो कि दो या तीन तलों (मंजिल) के हैं किन्तु उनमें भीतर प्रवेश करने का मार्ग सीढियों से ऊपर चढ़ कर भीतर नीचे उतरने का है जो मुझे आश्चर्यचिकत कर रहा है। वास्तव में ये वो काल था जब इस विचारधारा में बुरी तरह से वाममार्ग और अभिचारिक क्रियाओं ने अपना स्थान बना लिया था। शंकाराचार्य से शास्त्रार्थ में हार जाने के बाद ये विचारधारा महान् भारत से लगभग समाप्त ही हो गई और इसने पश्चिम में शरण ली वहाँ के ईसाई विचारधारा के प्रादुर्भाव के बाद वहाँ के मूल यहूदी भी परास्त हो चुके थे ऐसे मे इन दोनों को अपना हश्र एक समान प्रतीत हुआ और दोनेां ने हाथ मिला लिया। हमारे इतिहास में जो पढ़ाया जाता है कि अशोक ने बौद्ध धर्म का पूरे विश्व में प्रचार प्रसार किया तो उसका प्रचार-प्रसार मात्र पूर्व के चीन जापान,कोरिया, इण्डोनेशिया, मालदीन,जावा. सुमात्रा, कम्बाडिया आदि देशों में ही नहीं अपितु पश्चिम में अफगानिस्तान से आगे रेशम मार्ग से होते हुये यूरोप तक था। काण्ट ने अपनी पुस्तक द थियोगोनी आॅफ हिन्दूस में स्पष्ट किया है कि ये बौद्ध हैं यूरोप के ड्रूईड्स हैं। ये ड्रूईड्स यूरोप की एक गुप्त तरह से जीवन बिताने वाली जाति है जो बहुधा जंगलों में ही रहती है। तो मुझे पूर्व में ऐसा अनुमान था कि शंकाराचार्य से परास्त होकर बौद्धों ने यूरोप की शरण ली और यहूदी ओर बौद्धों का सम्बन्ध ही इल्युमिनाटी है। खैर हम प्रतिदिन लिख ही रहे हैं आगे सत्यता स्वयं ही प्रकट हो जायेगी।

ये लोग अलौकिक शक्तियाँ चाहते हैं अत: इनके अनुसार राजा दिव्य वंश का होना चाहिये इसलिये वह इल्युमिनाटी के प्रमुख 13 परिवारों में से होना चाहिये।

बिल्डरबर्गर्स

ये एक संगठन है जिसकी स्थापना 1954 में दो लोगों द्वारा हुई ये इल्युमिनाटी का एक महत्त्पूर्ण सह-संगठन है। यूरोप के कई आन्दोलनों में इस संगठन का गुप्त सहयोग रहा। 1954 से प्रतिवर्ष इस संगठन की एक गुप्त बैठक होती है और इसके सदस्य चुने नहीं जाते अपितु ये लोग ब्रिटेनिया कबीले के मुखियाओंके निकट सम्बन्धी अथवा मित्र होते हैं। इसलिये इल्युमिनाटी के पति निष्ठावान् होते हैं। इसके सभी सदस्य अत्यन्त धनिक वर्गहोता है जोकि यूरोप, अमेरीका और कनाडा से होते हैं। इसकी बैठक मिडिया में एक निश्चित स्तर तक भेजी जाती है तथा अधिकतर मीडिया पर इस समूह की अच्छी पकड़ है अत: जितनी सूचना ये चाहते हैं उतनी ही सूचना बाहर आती है। इस बैठक में कई देशों के विशेष राजनैतिक लोग होतेहै। यहाँ तक कि बैठक में आने जाने हेतु टिकट का प्रबन्ध भी समिति द्वारा किया जाता है और उनकी सभी तरह से देख भाल की जाती है। इनका मुख्य उद्देश्य एक ही है और वह है सार्वभौम् स्तर पर एक ही सरकार की स्थापना करना। उन्होंने ये कार्य2012 से प्रारम्भ कर दिया है तथा संयुक्त राष्ट्र संघ इनके लिये सेना अथवा पुलिस की तरह कार्य करेगी। इस कार्य में कम्प्यूटरो की महत्ती भूमिका रहेगी। इसलिये ही बिल गेट्स इल्युमिनाटी और माइक्रोसॉफ्ट के निदेशकों की समिति से जुड़ा रहता है और माइक्रों सॉफ्ट कम्पनी के मुख्यालय के अन्दर भी एक शैतान का मन्दिर है । इस बिल्डरबर्ग को अदृश्य सरकार कहा जाता है। पूरे विश्व के देशों के नेता भ्रष्टाचार के आधार पर इस संगठन को अपने देश को बेच रहे हैं।

डॉ.दिलीप कुमार नाथाणी

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