क्या है इल्युमिनाटी का वृहद् इतिहास

सन् 1754 में मार्टिनेज पासक्वेलिस Martinez Pasqualis, के द्वारा प्रथम बार इस संज्ञा इल्युमिनाटी का प्रयोग किया गया। बाद में 1790 में प्रोफेसर श्वार्टज Professor Schwartz of Moscow; जो कि रूस के थे। ये दोनों ही षडयन्त्रकारी, तांत्रिक थे जिन्होंने ही बाद में जैकब बॉहेन और एग्रेन्युअल स्वेडनबर्ग से विद्युत् विज्ञान के सिद्धान्त को चुराया था। इन दोनों ने संयुक्त रूप से इस संगठन के विस्तार में भूमिका निभार्इ्।
बावेरियन इल्युमिनाटी— एक मुक्त विचारकों का समूह था जो स्वयं को पूर्णसशक्त अथवा पूर्ण सही माना करते थे उस समूह के लोग आध्यात्मिक जाग्रति का एक ऐसा समूह था जो अपने अलगअस्तित्व के लिये अत्यधिक क्रियाशील था, उस समूह के आधारभूत कर्मचारियों ने मिलकर इसकी स्थापना की इसका मूल संस्थापक एडम था जो कि गिरजाघर के कानून का प्रथम प्रोफेसर था। उसने ही 1 मई 1776 को इसकी स्थापना की तथा ये इसे इल्युमिनाटी के आदेश अथवा बावेरियन इल्युमिनाटी कहा।

बावेरिया एक इसाई रूढ़िवादी क्षेत्र था, जहाँ आधुनिकता और आध्यात्मिक जाग्रति को चाहने वाले मैक्सिमिलयन तृती यवोन विटलसबक Maximilian III Joseph von Wittelsbach को पर्याप्त सफलता मिलनी प्रारम्भ हेा गई। रोमन कैथोलिक चर्च की ओर से इसको पर्याप्त समर्थन प्राप्त था। एक संस्था थी जीसुईट ये संस्था कैथालिक पुरुषों की संस्था थी। इसकी सफलता को देखते हुये बावेरियन शासन में 1784 में इस पर प्रतिबन्ध लगा दिया। बावेरियन प्रशासन ने ऐसी सभी संस्थाओं को प्रतिबन्धित कर दिया जो रहस्यमय, तन्त्र—मन्त्र आदि संदिग्ध उपासनाएँ किया करते थे, इल्युमिनाटी भी उसमें से एक थी। उस समय इल्युमिनाटी की भाँति एक अन्य रहस्यवादी संगठन था फ्रीमेसान्स, वह भी प्रतिबन्धित हो गया। परिणामस्वरूपा इल्युमिनाटी शाीघ्र ही नष्टप्राय: हो गई , परन्तु जैसे ही ये समाप्त होेने की सीमा तक पहुँची कर्ई राजनीतिज्ञों, बुद्धिजीवियों ने स्वयं को इसका सदस्य बताना प्रारम्भ कर दिया। इसके समर्थन में आने वाले बहुधा मेसोनिक थे। पुन: इसके सभी सदस्यों की सदस्यता व वरिष्ठता की दृष्टि से इल्युमिनाटी का त्रिधा विभाजन हुआ। अर्थात् इल्युमिनाटियों के जो सदस्य थे उनकी तीन श्रेणियाँ बनी इनमें से प्रथम श्रेणी को नर्सरी कहा गया अर्थात् प्रारम्भिक स्तर के सदस्य थे इनके कई नाम थे नवप्रशिक्षु (Novice, Minerval and Illuminatus Minor; )। द्वितीय श्रेणी के लोग मेसनरी कहलाते थे। इन्हें इल्युमिनाअस मेजर भी कहा जाता था बाद में इन्हें स्कॉच नाईट भी कहा जाने लगा। तृतीय व उच्च श्रेणी के सदस्यों को रहस्यवादी कहा जाता है। ये उच्च श्रेणी के सदस्य पुन: द्विधा विभाजित थे। प्रथम कनिष्ठ रहस्यवादी अथवा प्रशासकीय
रहस्यवादी और द्वितीय वरिष्ठ रहस्यवादी Lesser Mysteries (Presbyter and Regent) and those of the Greater Mysteries (Magus andRex). Relations )।
इन प्राचीन दो प्रमुख रहस्यवादी समुदायों का प्रथम मिलन म्यूनिख में हुआ और वहीं 1780में इसकी स्थापना हुई। और शनै: शनै: यूरोप के सभी देशों में इनके केन्द्र खुलने लगे। तथा मात्र 10 वर्ष में इस समुदाय के 10000 लेाग केवल स्पेन में थे, तथा वहाँ का बुद्धिजीवी वर्ग इसका अनुयायी बनने लगा। यह बड़े शर्म की बात थी। बावेरियन ने 1785 में इस पर पुन: प्रतिबन्ध की घोषण की जिसके कारण इसके आन्तरिक स्वरूप में गिरावट हुई।
सांस्कृतिक प्रभाव—
बावेरियन इल्युमिनाटी का प्रकट इतिहास में गम्भीर प्रभाव रहा इसके विरोधियों ने इस संगठन के बारे बहुत लिखा। यहाँ मैं ये कहना चाहूँगा कि वर्तमान में हमारे पास जो भी कुछ सामग्री है वह इल्युमिनाटी के विरोधियो द्वारा लिखी गई है और उसे हम निष्पक्ष नहीं कह सकते हमारे पास इस सन्दर्भ में कोई प्रमाणिक साक्ष्य नहीं और न ही प्राथमिक स्रेात है जो इल्युमिनाटी के इतिहास को सटीक व सर्वपक्षीय दृष्टिकोण से उद्घाटित किया जा सके। विभिन्न प्रकार के भयंकर और सनसनीखेज आरोप इल्युमिनाटी संगठन पर लगाए गए जिसके कारण इल्युमिनाटी जिसे फ्रिमेसान्स भी कहा जाता है उसका विश्व भर के सामान्य जन में एक रूप उभर कर आया जो कि वास्तव में बड़ा ही डरावना और विभत्स है किन्तु किसी ने भी इस संगठन के लोागों का प्रत्यक्ष में नहीं देखा है और न ही कोईप्रमाण है। इसी कारण 1797 में अगस्टीन नामक एक व्यक्ति ने एक ग्रन्थ लिखा में जिसमें कुछ इतिहास पर प्रकाश पड़ता है। ( Abbé Augustin Barruél published Memoirs Illustrating the History of Jacobinism outlining a vivid conspiracy theory involving the Knights Templar )और इल्युमिनाटी, रासीक्रूश्यिन्स, टेम्पलर, और इल्युमिनाटी के विरूद्ध एक संगठनात्मक रूप से विरोध का प्रचार होने लगा। तब एक स्कॉटिश मेसान जो कि प्रेाफसर प्रकृति विज्ञानी भी थे जिनका नाम जान राबिन्सन था। उन्होंने इन रहस्यवादी संगठनोंके सन्दर्भ में सकारात्मक रूप से छापना प्रारम्भ कर दिया साथ ही 1798 में उसने यूरोप के धर्म और वहाँ की सरकारों के विरूद्ध कई पत्रक, पुस्तके छपवाई तथा बाँटी। राब्न्सिन इस सम्बन्ध में कई प्रकट प्रमाण दिये कि इल्युमिनाटी नामक संगठन विश्व में से सभी सरकारों को समाप्त करके एक ही सरकार की स्थापना करना चाहता है। और ये संगठन इस हेतु क्रियाशील भी है। इनका उद्देश्य मात्र सरकारें ही नहीं अपितु विश्व के सभी धर्मों का भी सफाया करना है। तथा कई रहस्यवादी संगठनों में से एक संगठन है खोपड़ी और हड्डी संगठन Skull and Bones ये संगठन अमेरिका के इल्युमिनाटी संघ का अनुषांगिक संगठन है। एकलेखक हुये राबर्ट जिलेट उन्होंने दावा किया है कि ये इल्युमिनाटी नामक संघ विष्व में अपने राज्य की स्थापना एवं विश्व की सामूहित रूप से एक सरकारकी स्थापना हेतु सभी नीतियों का प्रयोग कर रहा है जिसमें हत्याएँ, ब्लैकमेल, बैंकों पर अधिकार, धन पर अधिकार, वित्तीय संसथाओं को अपने अधिकार में लेना तथा उसके लिये लोगों का मस्तिष्क नियन्त्रित करना दो देशों में लड़ाइयाँ करवाना येने केने प्रकारेण उच्च पदों पर इनके आदमी बैठे होने चाहियें जिससे ये जो चाहे जैसे चाहें करें और सम्पूर्ण विश्व इनका दास हो जाये इसके लिये इनकी सोच है कि राजनीतिक स्तर पर उच्च स्थानों पर इल्युमिनाटी के लोग होने चाहिये।
इसी परिप्रेक्ष्य में अन्य विचारक थामस जैफरसन का कथन है कि ये संगठन विश्व में सत्यादर्श और नैतिक सदाचारका प्रचार करना व स्थापना करना चाहता है। उपरोक्त दोनों विचारकों का मानना है कि कुछ भी हो किन्तु यूरोप के राजतन्त्र, चर्च तथा वर्तमान सरकारे इस रहस्मय संगठन के विरोधी है किन्तु जीसुइस्ट नहीं। बरेल का विचार है कि 1789 में फ्राँस की क्रान्ति जो कि जेकोबियनों के नेतृत्व में हुई थी उसके सूत्रधार इल्युमिनाटी ही थे, यही बात रूस के सन्दर्भ में थियोसिस्ट्स् भी कहते हैं कि वहाँ 1917 की क्रान्ति में इसी रहस्यवादी संगठन का ही हाथ था ।
क्रमश:

डॉ.दिलीप कुमार नाथाणी

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