हिन्दू समाज की दुर्दशा से गहन आक्रोश में हैं संत -यति नरसिंहानन्द सरस्वती

गुरुग्राम में होने वाली धर्म संसद के लिए संतों का आह्वान हिन्दू समाज की दुर्दशा से गहन आक्रोश में हैं संत -यति नरसिंहानन्द सरस्वती

अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने हिन्दू स्वाभिमान के राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष बाबा परमेन्द्र आर्य, हॉलैंड आर्य समाज के प्रचारक आचार्य ओमप्रकाश सामवेदी जी,यति कृष्णानन्द जी महाराज और अन्य संतो के साथ एक प्रेस वार्ता के माध्यम से जगदम्बा महाकाली डासना वाली के परिवार द्वारा गुरुग्राम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज की अध्यक्षता में 21 और 22 जुलाई 2018 को हो रही दो दिवसीय धर्म संसद की जानकारी दी।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा की आज हिन्दू समाज की जैसी दुर्दशा है उसे लेकर संत समाज में बहुत गहन आक्रोश है। संत और हिन्दू समाज एक दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे का कोई अस्तित्व नही रह सकता। आज हिन्दू समाज को समाप्त करने के षडयंत्रो को सन्त समाज शांत बैठकर नही देख सकता। हिन्दू समाज की विकट परिस्थितियों पर गम्भीर आत्मचिंतन और विमर्श के लिये जगदम्बा महाकाली डासना वाली के परिवार ने दूसरी धर्म संसद गुरुग्राम में 21 और 22 जुलाई को बुलाई है जिसमे इस देश में घटते हुए हिन्दू जनसँख्या अनुपात,हिन्दुओ में बढ़ते हुए जातीय वैमनस्य,मुस्लिम कट्टरपंथ के आगे घुटने टेकती हुई राजनैतिक व प्रशासनिक व्यवस्था,सनातन समाज को बदनाम करके सनातन आस्थाओं को समाप्त करने का कुचक्र, राजनैतिक कमजोरी के कारण रोज मरते सैनिक और नागरिक,हिन्दुओ की माँ,बहन और बेटियो पर लव ज़िहाद व रेप जिहाद पर तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग व राजनैतिक व्यवस्था का मौन व मेवात जैसे प्राचीन हिन्दू धार्मिक स्थलों के गौरव की पुनर्वापसी जैसे गम्भीर मुद्दों पर चर्चा होगी।

प्रेस वार्ता में बाबा परमेन्द्र आर्य ने कहा की आज धर्म की रक्षा के लिये सन्त और हिन्दू समाज को एक साथ खड़ा होना पड़ेगा। यदि आज संत और हिन्दू समाज में उचित समन्वय नही हुआ तो सनातन धर्म का अस्तित्व मिट जाएगा क्योंकि संत और हिन्दू समाज दोनों सनातन धर्म के अभिन्न अंग हैं। हम धर्म संसद के माध्यम से इनके उचित समन्वय के लिये कार्य कर रहे हैं और इनके समन्वय से ही हम अपने अस्तित्व की रक्षा कर पाएंगे।

आचार्य ओमप्रकाश सामवेदी जी ने बताया की आज जब सारा विश्व हमारी ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है,ऐसे में हिन्दू समाज की आंतरिक कमजोरी बहुत पीड़ादायक है। आज हमें अपने अंतर्विरोधों को समाप्त करके सम्पूर्ण विश्व को न्याय,शांति और धर्म के मार्ग पर लेकर जाना है। ये हम सबका दायित्व है और हम इसके लिये पूरा प्रयास करेंगे।

सुन्दर कुमार ( प्रधान संपादक )

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