जानिये त्राटक के नियम व सावधानियॉ

पलकों पर ध्‍यान ना दीजिये पलकों को जबरदस्‍ती खुला रखने का प्रयत्‍न ना कीजिये। पलक झपकी है झपकने दीजिये। जबरदस्‍ती आंखे खोले रखने पर आंखों की नमी सूख जाती है वा अंधापन आ जाता है। मगर नेट पर व किताबों में वर्णन आता है कि आप आधा एक घण्‍टा आंखे खुली ही रखों जबकि नये अभ्‍यासी के लिये ये असम्‍भव है। आंखें और ज्‍यादा देर तक खुली रहने का समय अपने आप ही आपके अभ्‍यास के अनुसार दिन बीतने पर बढता जाता है। आप टी वी देखते पर या कोई चीज देखते पर जिस प्रकार पलकों पर ध्‍यान नही देते उसी प्रकार से त्राटक कीजिये। आंखों पर ध्‍यान ही ना दीजिये। यदि कोई व्‍यक्ति वेट लिफटर बनने का प्रयास कर रहा है तेा पहले दिन वो बीस तीस किलो वजन ही उठा पायेगा फिर धीरे धीरे अभ्‍यास बढने पर वो समय के साथ चालीस किलो पचास किलो सौ किलो दो सौ किलो वजन उठाने लगेगा। मगर यदि उसको बताया जाये कि तुम एकदम से दो सौ किलो वजन उठा लो तो वो उसको हिला भी नही सकता या उसके उपर जबरदस्‍ती उतना वजन लाद दिया जाये तो गिर कर या उस वजन से दब कर उसकी हडडी पसली टूटेगी या उसकी मृत्यु होगी। इसी प्रकार से योग या ध्‍यान की कोई क्रिया है। आप अपने आप शरीर से कोई जबरदस्‍ती नही कर सकते1। यदि करेंगे तो अपना हानि  ही होगा। आपको शक्ति मिलेंगी नही बल्कि व्यय होगी। इस लिये अपनी आंखों को प्रयास और बल पूर्वक खुला रखने का प्रयास ना करे ओर जिस चीज पर त्राटक कर रहे है उसी पर अपनी दृष्टि स्थिर  कर पूरा ध्‍यान वही रखे।

त्राटक के लिये वस्‍तु से आंख की दूरी का कोई महत्व नही है। आपको जहॉ से अच्‍छी तरह वस्‍तु नजर आये वही पर रखिये। इसकी दूरी तीन फिट से दो चार किलोमीटर तक कुछ भी हो सकती है// दूर का  भवन टावर पेड चांद तारा आदि कुछ भी। दूरी कोई अर्थ नही रखती।।

ये कह देने से कि आंखे खुली रखना पलक ना झपकाना। बस आदमी का विश्‍वास इस विधि से टूट जाता है वो सोचता है कि ये बडा मुश्किल है मै नही कर पाउंगा । जो बडे सिद्ध महात्‍मा होते है जो ये करते है। घण्‍टा दो घण्‍टा आंखे खुली रहने वाली स्थिति साधना की आगे की अवस्‍था में आती है मगर लोग वो बाद की अवस्‍था प्रारंभिक  साधकों को बता कर भ्रमित करते है। आदमी त्राटक को बेकार समझता है जबकि तीसरा नेत्र वा सहस्रार जागरण की इससे अच्‍छी विधि नही है। मगर इसकी कठिन व्‍याख्‍या के कारण कोई व्यक्ति  इसमें छुपे वैज्ञानिक तथ्‍य को नही समझ पाता व दो चार बार प्रयास के बाद ही इसको व्यर्थ कह कर निराश होकर इसको छोड देता है।

त्राटक या ध्‍यान की कोई भी क्रिया करने के बाद आधा घण्‍टा योग निद्रा अवश्‍य करे।। योग निद्रा हमारे किसी भी अभ्‍यास को दस गुना तेजी से बढाने में सहायक है।

त्राटक के बाद यदि आपको तुरन्‍त उठना है तो दस मिनट बाद आंखों को सादे पानी से धो लीजिये

यदि आंखों में किसी प्रकार का कष्‍ट अनुभव हो तो ये क्रिया कुछ दिनों के लिये रोक दे। यदि आंख में संक्रमण वाली कोई ऋतु जन्य  व्याधि है जिसे आंख उठना कहते है तो उस समय त्राटक ना करें क्‍योंकि उस दशा में आंखों पर अतिरिक्‍त दबाव पडता है क्‍योंकि रोग की दशा में आंखों की स्नायु  में सूजन या शोथ आ जाती है। आपके द्वारा त्राटक का अभ्‍यास करने पर वो आपको और हानि करेगा।

दिन में दो बार अपनी सुविधानुसार किसी निश्चित समय पर 45 मिनट से लेकर 1 घण्‍टा तक त्राटक करे। शुरू में हर आदमी इतनी देर त्राटक नही कर पायेगा। इस दशा में यदि आप अपनी आंखों की क्षमता के अनुसार दस बीस मिनट में ही आंखों मे तनाव अनुभव कर रहे है तो आप दस बीस मिनट ही त्राटक करे। मगर उसके बाद भी आप पूरा एक घण्‍टा उसी स्‍थान पर शांति से आंख बंद करके बैठने का अभ्‍यास करे। इससे आपके मन की आदत होगी शांत होने की। यदि आपने बीस मिनट त्राटक किया तो उसके बाद शांति से बैठ कर अपने आप काे अनुभव कीजिये। मन बार बार भागेगा मगर उसको फिर वही खीच लाइये। अपने आप को महसूस कीजिये अपनी सांसों पर ध्‍यान दीजिये अपनी सांसों को चलता देखिये। एक घण्‍टा बैठने का तात्‍पर्य यही है कि हमारी आदत पडनी चाहिये ध्‍यान के लिये एक ही स्‍थान पर एक घण्‍टा बैठने की।

बहुत से लाेग पूछते है कि एक साथ सारे त्राटक कर सकते है या नही।। हॉ कर सकते है तथापि एक समय में एक ही त्राटक करे। यदि एक घण्‍टा त्राटक करते है तो एक ही चीज पर एक घण्‍टा त्राटक कीजिये। अगली बार जब त्राटक करे तो दूसरी चीज पर कीजिये। सबका प्रभाव एक ही है।

जिन लोगों की दृष्टि क्षीण  है वो त्राटक का समय पॉच दस मिनट से शुरू करे व धीरे धीरे समय बढाये। धीरे धीरे नजर ठीक हो जायेगी। धैर्य की आवश्‍यकता है त्राटक ध्‍यान या प्राणायाम में किसी प्रकार की जोर बलपूर्वक  अपने शरीर के साथ ना करे।। ये  आपको स्‍थाई रूप से नुकसान पहुचा सकती है।

आप किसी भी चीज को एकटक देख कर त्राटक कर सकते है। मेज पर रखा कलम कप गिलास आदि कोई भी वस्‍तु। दूर कोई टेलीफोन टावर मकान खम्‍भा चॉद तारा आदि। बस नजर चीज पर जमा लो ध्‍यान से देखते रहो कुछ ना सोचो। सडक चलते हुये भी कर सकते है सडक की हर चीज को ध्‍यान से देखों कोई विश्‍लेषण मत करो मन शांत रहने लगेगा। मगर यदि कोई अच्‍छी अध्‍यात्मिक सफलता शक्ति या सिद्धि चाहिये तो नित्य दो तीन बार सही प्रकार से उपर बताई विधियों से त्राटक करना चाहिये। किसी चीज पर जब हम नजर जमाते है तो उसके आसपास की चीजें दिखना बंद हो जाती है तो समझ लो कि आपका मन शांत हो रहा है और आपको ध्‍यान में सफलता मिल रही है। ध्‍यान की सबसे सफल व शीघ्र सफलता दिलाने वाली विधि त्राटक है।

कोई भी त्राटक तेज प्रकाश में ना करे। उसके लिये दिन का प्राक्रतिक प्रकाश या रात में दीपक के प्रकाश का प्रयोग  करे। तेज चमकती चीजों पर त्राटक ना करे जैसे बिजली का बल्‍ब हैलोजन टीवी स्‍क्रीन कम्‍प्‍यूटर या मोबाइल स्‍क्रीन आदि।
डॉ.दीनदयाल मणि त्रिपाठी  ( प्रबंध संपादक )

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3 thoughts on “जानिये त्राटक के नियम व सावधानियॉ

  • April 28, 2020 at 6:28 am
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    Hum tratak bina guru k kar skte h khud hi

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    • May 3, 2020 at 3:51 pm
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      बिना गुरु के कोई भी साधना नहीं करनी चाहिए

      Reply
  • October 3, 2020 at 11:48 am
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    Sir mai kutch nsa nai karta lekin kabhi kabhi beer p leta hu….. Baki kutch nsa nai karta…. Too kya mai tratak kar sakta hu

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