प्राचीन भारतीय साहित्य में विश्व मानचित्र का सन्दर्भ

 

अरुण उपाध्याय (धर्म शास्त्र विशेषज्ञ )

आर्यभटीय में लिखा है कि उत्तर ध्रुव जल भाग पर तथा दक्षिणी ध्रुव स्थल भाग पर है। आर्यभटीय का काल ३६० कलि (२७४२ ई पू) था जिसमें एक शून्य जोड़ कर ३६०० कलि (४९९ ई) कर दिया जिससे उनकी ज्या सारणी को ग्रीक हिप्पार्कस की सारणी की नकल कहा जा सके। हिप्पार्कस ने कभी ऐसी सारणी नहीँ बनायी थी न ग्रीक संख्या पद्धति में ऐसी गणना सम्भव है। आर्यभट कभी ध्रुव पर नही गये थे न उनके पास जाने का कोई साधन था। वह चले भी जाते तो उनके पास ऐसा कोई साधन नहीँ था कि ध्रुव स्थल की पहचान कर सकें। १९०९ में पहली बार ग्रीनलैंड मार्ग से उत्तर ध्रुव पहुंचे थे तथा पता लगाया कि वह जल भाग पर है। उसी वर्ष पुणे फर्ग्युसन काॅलेज में गणित के प्राध्यापक बाल गंगाधर तिलक ने पुस्तक लिखी कि आर्य लोग उत्तर ध्रुव में रहते थे-Arctic Home in Vedas। दक्षिणी ध्रुव का पता १९३१ में एमण्डसन द्वारा लगा। १९८५ में पहली बार पता चला कि अंटार्कटिक के दो भूखण्ड है तथा उनके बीच ध्रुव के निकट से गुजरता हुआ समुद्र है। २ किलोमीटर बर्फ की परत के कारण १९८५ में echo sounding से पता चला कि जल तट के पास भूमि पर ही ध्रुव है। आर्यभट को यह ज्ञान प्राचीन पुराणों से ही हो सकता है। उत्तर गोलार्ध का नक्शा ४ भाग में बनता था जिनको भूपद्म का ४ दल कहा गया है।  गोल का समतल चित्र बनाने से ध्रुव के निकट उसका आकार बढ़ने लगता है तथा ध्रुव विन्दु पर अनन्त हो जायेगा। उत्तर ध्रुव में जल भाग होने से समस्या नही थी, पर दक्षिण ध्रुव का आकार अनन्त होता था अतः उसे अनन्त द्वीप कहते थे। जुड़वां द्वीप होने से यह यम द्वीप था। इस कारण यम दक्षिण दिशा का स्वामी है। इसके निकट का मुख्य द्वीप न्यूजीलैंड भी जुड़वां द्वीप है, अतः इसे यमकोटि द्वीप कहते थे। इसका पत्तन था यमकोटिपत्तन था जिसे सूर्य सिद्धान्त में लंका या उज्जैन से ९० अंश दूर कहा गया है। उज्जैन से १८० अंश पूर्व सिद्धपुर था जहाँ पूर्व दिशा के अन्त का चिह्न देने के लिए ब्रह्मा ने एक द्वार (पिरामिड) बनाया था (रामायण, किष्किन्धा काण्ड, ४०/५४, ६४)। यह मेक्सिको का सूर्य पिरामिड है। उज्जैन से ९० अंश पश्चिम रोमकपत्तन था (मोरक्को के पश्चिम समुद्र तट) जहाँ के लोगों ने यूरोप में जाकर रोमन राज्य बनाया। उसी संघर्ष में मोरक्को के हनिबाल ने रोम पर आक्रमण किया था।

पुराणों में अन्य प्रकार के सन्दर्भ नगर थे-इण्डोनेशिया के पूर्व भाग में इन्द्र की अमरावती (किष्किन्धा काण्ड अध्याय ४०), उसके ९० अंश पश्चिम यम की संयमनी (अम्मान), ९० अंश पूर्व वरुण की सुखा नगरी (हवाई द्वीप या फ्रेन्च पोलीनेशिया) तथा १८० अंश पूर्व सोम की विभावरी (गुयाना या वाशिंगटन के निकट) थी।

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