मासिक धर्म और हिंदुत्व : सम्पूर्ण वास्तविकता

मनन एन

“हे देवी, तुम जो रजस्वला होकर जीवनदायिनी होती हो – तुम्हें कोटि कोटि प्रणाम है ”
– मनन

प्रकृति तीन गुणों में व्यक्त होती है – सत्व, रजस और तमस ।

सत्व वह जो अधिकाधिक शिव के निकट हो, रजस वह जो अधिकाधिक शिव के संसार-रूप के निकट हो और तमस वह जो अधिकाधिक शिव की अहंकार वाली स्थिति (Individual) के निकट हो ।

रजस्वला : नाम में ही रजस है ।

तो रज/रजस क्या है ?
रजस है बेसिक आधार जो संसार को टिकने देता है ।
सुना होयेगा आपने के संसार को स्थित/पोषित श्रीहरिविष्णु रखते हैं, और संसार स्थित/पोषित कैसे रहता है ?

संसार स्थित/पोषित रहता है – करेंसी के थ्रू !!

Currency is what stays Current !
Currency is what creates Current of incentive for labour!
Currency is what creates and crumbles current affairs !

रेत/मिट्टी के कण/शरीर की धूल को भी रज कहते हैं। धरती से ही चांदी प्राप्त होता है और चांदी केमिकली अधिक रिएक्टिव नहीं होता इसलिये पहले चांदी के पिंड ऐसे ही भूमि में मिल जाते थे – इसलिये चांदी को ‘रजत’ कहते हैं – जो शायद इतिहास में अधिकतम प्रयुक्त हुआ है करेंसी के रूप में …..

क्या आप बता सकते हैं कि संसार में सबसे बड़ी करेंसी क्या है ?

ना ! डॉलर नहीं होती सबसे बड़ी करेंसी !

स्वर्ण भी नहीं !

पेट्रोल/डीज़ल तो कतई नहीं !

संसार की सबसे बड़ी करेंसी है – Manpower : जो संसार को चलाती है !!

है ना ?!?

Manpower is what always remains Current ! आतंकवादियों तक में, साधू संन्यासियों तक में !

हिन्दू शास्त्रों में धन की सबसे बड़ी डेफिनिशन है – धन वह है जो द्रव्य/करेंसी पैदा करे ।
इसलिये भूमि को धन कहा गया है – जो अनाज पैदा करती है और भूमि के मालिक को भूमि का पति (Husband) कहा गया है जो उस भूमि में बीज डालकर अनाज पैदा करता है ।

लेकिन अनाज की कोई वैल्यू नहीं होती जब तक उसे कोई खाने वाला न हो, इसलिये भूमि से बड़ा धन होती है। स्त्री (पत्नी) : वह पत्नीदेवी जो आपके बीज को लेकर आपके पुत्र उत्पन्न करती है – वे पुत्र जो अनाज को खाकर उस अनाज को वैल्यू प्रदान करते हैं और यहाँ से अर्थव्यवस्था शुरू होती है ।

तो पत्नीदेवी ही है अर्थव्यवस्था का मूल !!

☝ इसीलिये पत्नीदेवी को ‘लक्ष्मी’ कहा जाता है – वह वास्तव में लक्ष्मी होती है … वही लक्ष्मी होती है (Single Boys! Take notes 😁)

देवी के पत्नीरूप को कोटि कोटि प्रणाम !!

लेकिन क्या हो कि यदि ये देवी रजस्वला ही न हो तो ?
तो पुत्र/पुत्री न होंगे, और अनाज की वैल्यू समाप्त और बेसिकली अर्थव्यवस्था समाप्त और संसार समाप्त !

स्त्री के रजस्वला होने पर तुम्हारा अस्तित्व टिका है मूर्खों !
रजस्वला होना अत्याधिक शुभ होता है – शायद संसार की शुभतम घटना होती है स्त्री का रजस्वला होना ! बांझ स्त्री को बुरा कहा गया है, क्योंकि वह अपने स्त्रीत्व के अनन्त पोटेंशियल का मात्र .00000001 से भी कम उपयोग कर पाती है मानवता के लिये ।

तो स्त्री का रजस्वला होना संसार की शुभतम घटना है । रजस्वला स्त्री जो होती है वो देवी का सबसे निकटतम रूप होती है – वह पूजनीय होती है, वह तांत्रिक/वैदिक स्वातंत्र्य को सबसे अधिक व्यक्त कर रही होती है – वह तादात्म्य(sync) में होती है प्रकृति के : उसके आचार विचार सब कुछ individuality से थोड़ा सा ऊपर के हो जाते हैं जब वह रजस्वला होती है। (मसलन, एक बहुत ही शांत स्त्री चिड़चिड़ी हो सकती है उन विशेष दिनों में अथवा एक नीरस-सपाट स्त्री बहुत कमनीय हो सकती है उन विशेष दिनों में : अर्थात उन विशेष दिनों में अपनी लिमिटेड पर्सनालिटी से कुछ अधिक हो जाती है स्त्री – वह देवी रूप हो जाती है – प्रकृति का ही एक एक्सप्रेशन हो जाती है वह !! )

उत्तराखंड में तो जब बेटी रजस्वला होती है तो उसे खासतौर पर महादेवी दुर्गा के मंदिर ले जाया जाता है बाकायदा सजा धजा कर ! ! !

और कुछ महाघटिया और चूतिया किस्म के लोग कहते हैं कि स्त्री अपवित्र होती है उन विशेष दिनों में !!
छी !! घिन आती है मुझे ऐसे लोगों से और ऐसा सिखाने वाले उनके पूरे सम्प्रदाय से !!! ऐसे लोग किसी स्त्री के पांवों की धूल को चाटने के काबिल भी नहीं !!

भारत में कई देवी के मंदिर ऐसे हैं जहाँ कहते हैं कि मंदिर की अधिष्ठात्री देवी रजस्वला होती है – उन दिनों में ऐसे मंदिरों के आस पास मेले लगते हैं उत्सव होता है !!

रजस्वला स्त्री देवी का स्वरूप होती है – इसलिए उससे चरणस्पर्श नहीं कराए जाते (आपको देवी के चरणस्पर्श करने चाहिए न के उससे चरणस्पर्श करवाने चाहिए) !
यहां तक के Male देवता भी लज्जित अनुभव करते हैं यदि कोई रजस्वला स्त्री उनकी पूजा करे – क्योंकि वह रजस्वला स्त्री देवी का निकटतम व्यक्त रूप है !!!

इसलिये रजस्वला स्त्रियों का केवल Male देवताओं के मंदिर में प्रवेश निषिद्ध होता है – न कि किसी देवी मंदिर में !! अरे जब मंदिर की देवी स्वयं रजस्वला होती है तो किसी और रजस्वला स्त्री का प्रवेश कैसे निषिद्ध हो सकता है बे ?!

तो कृपया पूरी बात समझें, धर्म को पाखंड न बनाएं और स्त्री को सदैव देवी की दृष्टि से देखें – क्योंकि आप को तो शिवत्व प्राप्त करने के लिये तपस्या लगेगी लेकिन स्त्री में शिवत्व प्राकृतिक ही व्यक्त होता है – तभी कश्मीरी शैव सिस्टम में कहा भी जाता है कि स्त्रियां अधिक आसानी से आध्यात्म के उच्चतम स्थितियों तक पहुंच सकती हैं पुरुषों के मुकाबले ।

एक बात और : वो कीटाणु विषाणु वाले पॉइंट्स कृपया अपने पास रखें … हज़ारों वर्षों में आज तक एक भी आदमी नहीं मरा है किसी स्वस्थ स्त्री के रजस्वला रक्त के सम्पर्क में आने से – याद रखना !!

इसलिये खासतौर पर रजस्वला स्त्री का सम्मान करें – हिंदुत्व यही सिखाता है ।

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मिस्टिक पावर (dharmik news) एक प्रयास है धार्मिक पत्रकारिता(religious stories) में ,जिसे आगे अनेक लक्ष्य प्राप्त करने हैं सर्वप्रथम पत्रिका फिर वेब न्यूज़ और अगला लक्ष्य सेटेलाइट चैनेल ............जिसके द्वारा सनातन संस्कृति(hindu dharm,sanatan dharma) का प्रसार किया जा सके और देश विदेश के सभी विद्वानों को एक मंच दिए जा सके | राष्ट्रीय और धार्मिक समस्याओं(hindu facts,hindu mythology) का विश्लेषण और उपाय करने का एक समग्र प्रयास किया जा सके |

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