विश्व पुस्तक मेले में सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित ग्रन्थों को पाठकों का स्नेह

सुन्दर कुमार (प्रधान संपादक)

दिल्ली – आजकल हिंदू राष्ट्र शब्द ‘सेक्युलर भारत’ में आक्षेपजनक माना जाता है । कुछ लोगों को तो ‘हिंदू’ इस शब्द के संदर्भ में ही मूलभूत आक्षेप है कि ‘हिंदू राष्ट्र’ की कल्पना असंवैधानिक है। सामाजिक सौहार्द्र की डींगे हांकने वालों को ‘हिंदू राष्ट्र’ संकीर्ण अथवा कट्टरपंथी प्रतीत होता है। अहिंदू पंथियों को लगता है कि हिंदू राष्ट्र उनकी प्रगति में रुकावट बनेगा । यह आक्षेप प्रातिनिधिक उदाहरण हैं, ऐसे अनेक आक्षेप हिंदू राष्ट्र इस शब्द को घेरे हुए हैं । इन क्षेत्रों की वास्तविकता क्या है? भारत स्वयंभू ‘हिंदू राष्ट्र’ है क्या? एवं हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए कार्य करने वालों का मूलभूत विचार क्या है, इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए ही ‘हिंदुराष्ट्र – आक्षेप एवं खंडन‘ इस ग्रंथ का प्रकाशन किया गया है ।
अनादि काल से ‘हिंदू राष्ट्र’ भारत की पहचान थी । इस्लाम एवं ब्रिटिश शासन काल में भी हिंदू राजाओं ने यह पहचान बनाए रखी थी । वर्ष 1947 के विभाजन के उपरांत भारत की यह पहचान मिटाने का संविधान सभा में असफल प्रयत्न हुआ । तथापि वर्ष 1976 में इंदिरा गांधी ने असंवैधानिक पद्धति से भारतीय संविधान में सेक्युलर शब्द जोड़कर भारत की हिंदू राष्ट्र की पहचान समाप्त कर दी । आज लगभग 43 वर्षों में ही विदेश से लाया सेकुलर शब्द सम्मानीय हैं और हिंदू राष्ट्र निकृष्ट श्रेणी का माना जा रहा है। उससे भी आगे, वर्तमान में हिंदू राष्ट्र का उच्चारण ही अवैध सिद्ध करने का दुष्ट प्रयत्न चल रहा है । यही स्थिति बनी रही तो भारत में भविष्य में ‘अहिंदू राष्ट्र’ होने का भय है । ऐसे समय पर हिंदू राष्ट्र के संदर्भ में आक्षेपों का खंडन करना आवश्यक है। यही इस ग्रंथ का प्रयोजन है। यह ग्रंथ पढ़कर हिंदुओं के मन से हिंदू राष्ट्र इस शब्द के प्रति आक्षेप दूर हों और वे भी संवैधानिक दृष्टिकोण से भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के कार्य में सक्रिय हों, ये ग्रंथ प्रकाशित करने का उद्देश्य है।

आज बच्चों में परीक्षाओं को लेकर अत्याधिक तनाव रहता। इस कारण उनकी क्षमताओं का न पूर्ण विकास है, न उपलब्ध क्षमताओं का पूर्ण उपयोग, ऐसे में यह ग्रंथ ‘अध्ययन कैसे करें ? (विफलताओं के कारणों एवं उपायों सहित)’ इस दिशा में मार्गदर्शक ग्रंथ है। इसमें कठिन विषयोंका अध्ययन कैसे करें? अध्ययन में एकाग्रता कैसे बढाएं? स्मरणशक्ति बढाने के लिए क्या करें? परीक्षा का भय भगाने के उपाय क्या हैं? अध्ययन अच्छा होनेके लिए क्या करें और क्या न करें ? बच्चों की अध्ययन में रुचि बढने हेतु अभिभावक क्या करें?
विद्यार्थियोंके लिए ऐसे प्रश्नोंकी उपयुक्त जानकारी इस ग्रंथमें दी गई है । ‘बच्चों, परीक्षाकी चिंता छोडो ! उज्ज्वल भविष्यकी गुरुकुंजी अपनाओ’, ऐसा विश्वास दिलानेवाला यह ग्रंथ हैं।
इन दोनो ग्रंथों को ग्रंथ प्रदर्शनी में आने वाले जिज्ञासाओं ने उत्तम प्रतिसाद दिया है ।
साथ ही सनातन द्वारा विविध विषयों पर ग्रन्थ प्रकाशित किए गए हैं, जैसे अध्यात्म, राष्ट्ररक्षण, धर्म, धर्म पर होने वाले आघात, साधना, धार्मिक कृतियां, आचार पालन, बालसंस्कार, बच्चों का पालन पोषण किस प्रकार करें, आयुर्वेद, इत्यादि। 322 ग्रंथों की 17 भाषाओं में 78 लाख 54 हजार से अधिक प्रतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं | हिंदी के ग्रंथ प्रगति मैदान के हाल क्र. 12 ए में स्टॉल क्र. 66-67 पर उपलब्ध हैं, और अंग्रेजी ग्रंथ हाल क्र. 8-11 में स्टॉल क्र. 268 पर उपलब्ध हैं।

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