हिन्दू नारी संसद में धर्म और देश रक्षार्थ पारित हुए 5 प्रस्ताव

1.मुस्लिम बहनों से प्रेरणा लेकर अपने परिवार को मजबूत करें हिन्दू नारियां
2.जातिवाद और छुआछूत को अधार्मिक और अशास्त्रीय मानकर जातिवाद और छुआछूत का संपूर्ण निषेध करें हिन्दू नारियां
3.नारी रक्षा के लिये हर नारी के लिये अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण की व्यवस्था करे भारत सरकार
4.जिस भी घर में बहन बेटी हो,उस घर के पुरुषों को शस्त्र लाइसेंस दे भारत सरकार
5.आधुनिकता की अंधी होड़ में शामिल होने के जगह अपने परिवार और संतान की रक्षा और मजबूती पर बल दें हिन्दू नारियां
जगदम्बा महाकाली डासना वाली और महादेव शिव के विधिवत पूजन के साथ शिवशक्ति धाम डासना की श्रीमहंत और हिन्दू स्वाभिमान की राष्ट्रीय अध्यक्ष यति माँ चेतनानन्द सरस्वती जी के आह्वान पर शिवशक्ति धाम डासना में दो दिवसीय हिन्दू नारी संसद का शुभारंभ हुआ।हिन्दू नारी संसद की अध्यक्ष देश की एकमात्र महिला जगद्गुरु शंकराचार्य त्रिकाल भवंता जी,मुख्य संयोजिका श्रीमती शशि चौहान और मुख्य समन्वयक चौधरी अंजली आर्य हैं। हिन्दू नारी संसद के पहले दिन आज मुख्य रूप से हिंदूवादी और राष्ट्रवादी संगठनों से जुडी महिलाओं ने भाग लिया।
आज हिन्दू नारी संसद में मुख्य रूप से पांच प्रस्ताव पारित किए गए।
हिन्दू नारी संसद की अध्यक्षता करते हुए महिला शंकराचार्य त्रिकाल भवंता जी ने कहा की सम्पूर्ण प्रकृति में भगवान् की सर्वोत्तम रचना माँ है। भगवान हर जगह और हर किसी के साथ नही हो सकते इसीलिये उन्होंने हर प्राणी के लिये माँ दी है। वस्तुतः माँ भगवान का ही एक रूप है इसीलिये माँ की जिम्मेदारी भी सबसे ज्यादा है। माँ ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है। माँ के दिए हुए संस्कार से ही कोई व्यक्ति अपना सम्पूर्ण जीवन व्यतीत करता है इसीलिये ये एक माँ की ही जिम्मेदारी है की वो अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देकर देश का जिम्मेदार नागरिक बनाये। माँ का ही यह दायित्व है की वो अपने बच्चों को हर बुराई के विरुद्ध संघर्ष करने में सक्षम बनाये। दुर्भाग्य से आज हिन्दू समाज की नारियों ने अपने परिवार को कमजोर और अपने बच्चों को कायर बनाने का महापाप किया है जिसके कारण आज हिन्दू समाज की यह दुर्गति हुई है।अब यदि माताओं ने अपने परिवार को सबल और अपनी संतान को मानसिक और शारारीक रूप से हर संघर्ष के लिये सक्षम नहीँ बनाया तो संपूर्ण मानवता के विनाश की जिम्मेदारी माताओं पर ही होगी। हमारा तो धर्म यही कहता है की माताओं को अपने बेटे वीर अभिमन्यु की तरह पराक्रमी बना कर उन्हें धर्म की रक्षा के लिये रणक्षेत्र में भेजने चाहिये।
हिन्दू नारी संसद को संबोधित करते हुए यति माँ चेतनानन्द सरस्वती जी ने बताया की हमारा धर्म कहता की माँ का एक सर्वोच्च रूप महाकाली भी है जो अपनी संतानों की रक्षा के लिये राक्षसों का न केवल संहार करती हैं बल्कि अगर जरूरत पड़े तो रक्तबीजों का संहार करने के लिये उनकी रक्त की एक एक बूंद को।पी लेती हैं। आज वास्तव में हिन्दू की कमजोरी का कारण परिवार का कमजोर होना है जिसके लिये मुख्य रूप से महिलाये ही जिम्मेदार हैं। अब नारियों के लिये सम्भलने का समय है।
हिन्दू नारी संसद को संबोधित करते हुए श्रीमती जयवंती देवी जी ने कहा की बार बार हिन्दू ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिये मुसलमानो को कोसते हैं। ये बहुत ही गलत बात है। अरे यदि मुसलमान अपने परिवार मजबूत कर रहे हो तो किसी को क्या दिक्कत है। यदि हिन्दुओ में दम है तो वो मुसलमानो को कोसने की जगह उनसे ज्यादा बच्चे पैदा करके दिखाये।
हिन्दू नारी संसद के अखिल भारतीय महिला क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती राजबाला तोमर, आर्य विदुषी ममता आर्य, नारी उत्थान समिति की रजनी शुक्ला,डॉ अमिता त्यागी,पूजा रस्तोगी,विनीता सिसोदिया,नेहा नागर सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
सुन्दर कुमार (प्रधान सम्पादक)

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