हिन्दू राष्ट्र के प्रण के साथ हिन्दू अधिवेशन का समापन   

आज भारत अनेक समस्याओं  से घिरा हुआ है । भ्रष्टाचार, बलात्कार, जिहादी आतंकवाद, बेरोजगारी, गरीबी आदि समस्याएं विकराल रूप धारण कर चुकी हैं । देश को स्वतंत्रता मिले 7 दशक बीत गए; परंतु भारतीय लोकतंत्र अभी तक इन समस्याओं  का प्रभावशाली समाधान नहीं ढूंढ पाया है । दूसरी ओर समान नागरी कानून न बनाने के कारण, हिन्दुओं  के ही देश में उनके साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार हो रहा है । लाखों कश्मीरी हिन्दुओं  को अपने ही देश में अपने अधिकारों के लिए 3 दशकों से संघर्ष करना पड रहा है । भोलेभाले हिन्दुओं  को लालच दिखाकर, उनका धर्मांतरण किया जा रहा है । करोडों हिन्दुओं  के लिए पूजनीय गोमाता की हत्या हो रही है, इन समस्याओं  की ओर कोई ध्यान नहीं देता । ऐसी स्थिति बन गई है कि शंका रहती है कि जाने कब जम्मू-कश्मीर, बंगाल, असम, केरल आदि राज्य भारत से अलग हो जाएंगे  । धर्मनिरपेक्षता का ढोल पीटनेवाले भारत में हीन सत्तानीति के लिए अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण तथा बहुसंख्यकों के साथ अन्याय, यही धर्मनिरपेक्षता की व्याख्या बन गई है । चाहे भारत के टुकडे हो जाएं; परंतु हम धर्मनिरपेक्षता नहीं छोडेंगे, यह आज देश के कथित धर्मनिरपेक्षतावादियो  का विचार है । यह देश के लिए घातक है । विश्‍व का सबसे बडा लोकतंत्र कहलानेवाले भारतीय लोकतंत्र की क्या यह असफलता नहीं है ? संक्षेप में कहा जाए, तो विगत 70 वर्षों के अनुभव को देखते हुए अब राजनीतिक स्तर पर राष्ट्र तथा धर्म का हित संजोना असंभव है ।

‘वसुधैव कुटुम्बकम् ।’ और ‘सर्वेत्र सुखिन: सन्तु…’ की शिक्षा देनेवाले हिन्दू धर्म का अधिष्ठान ही वास्तव में भारत को उसका पुनर्वैभव प्राप्त कर दिला सकता है । इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर वर्ष 2012 में पहली बार अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन का आयोजन किया गया । हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित इस अधिवेशन का यह7वां वर्ष था । 2 से 12 जून 2018 की कालावधि में गोवा में यह सप्तम अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ । भारत के 18 राज्यों सहित नेपाल,बांग्लादेश तथा श्रीलंका से उपस्थित धर्माचार्य, संत, महंत, अधिवक्ता, सेवानिवृत्त न्यायाधीश, विचारक, पत्रकार, डॉक्टर ऐसे 175 हिन्दू संगठनों के 375 से भी अधिक हिन्दुत्वनिष्ठ प्रतिनिधियों ने इस अधिवेशन के माध्यम से हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई ।

इस अधिवेशन में बंगाल से आए श्री. उपानंद ब्रह्मचारी एवं ओडिशा से आए श्री. अनिल धीर ने कहा कि पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश एवं श्रीलंका के हिन्दुओं  के साथ हो रहे अत्याचारों में बहुत बढोतरी हुई है । हिन्दुओं  की हत्याएं, धर्मांतरण, महिलाओं  के साथ बलात्कार तथा हिन्दुओं  की संपत्ति को हडपने जैसी घटनाएं प्रतिदिन हो रही हैं । राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन घटनाओं  की जानबूझकर उपेक्षा की जा रही है । विदेश में हिन्दुओं  के हो रहे वंशविच्छेद को रोकने के लिए, भारत सरकार को ठोस कार्ययोजना बनाकर उसका कार्यान्वयन करना आवश्यकता है ।

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी ने इस अधिवेशन का उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए अपने भाषण में कहा, विश्‍व के सभी देशों में वहां के बहुसंख्यकों का धर्म, संस्कृति, भाषा तथा हित को संरक्षण दिया गया है । केवल भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जहां हिन्दू बहुसंख्यक होते हुए भी संविधान में हिन्दुओं  को किसी प्रकार का संरक्षण नहीं दिया गया है । इसके विपरीत भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों के पंथ, संस्कृति, भाषा तथा उनके हितों को संरक्षण दिया है । यह संविधान में निहित समानता के तत्त्व के (लॉ ऑफ इक्वॅलिटी) के विरुद्ध है । भारत के बहुसंख्यक हिन्दुआें का धर्म, संस्कृति, भाषा तथा उनके हितों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त हो, इसके लिए ही हिन्दू संगठनों के इस अधिवेशन का आयोजन किया है ।

अधिवेशन की प्रमुख गतिविधियां !

इस अधिवेशन में नेपाल, बांग्लादेश तथा श्रीलंका से आए हिन्दुत्वनिष्ठों ने अपनी समस्याएं रखीं । अधिवेशन के समय में भारत सरकार के प्रति उनके अपेक्षाओं  को रखने के लिए पत्रकार परिषदें आयोजित की गई थी । संपूर्ण भारत की सैकडों हिन्दुत्वनिष्ठों ने इन देशों के हिन्दुओं  के साथ दृढता के साथ खडे होने की घोषणा की । ‘ज्ञाति संस्थाएं आणि संप्रदायों के माध्यम से धर्म एवं संस्कृति की रक्षा’, ‘राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के उद्देश्य से युवकों का संगठन’, ‘हिन्दू संगठन तथा संप्रदायों का शासन द्वारा हो रहा दमन’, ‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए विचारक तथा प्रसारमाध्यमों के लिए आवश्यक कार्य’, ‘वर्तमान लोकतंत्र के कारण फैली दुष्प्रवृत्तियों का प्रतिकार तथा धर्मरक्षा के उद्देश्य से न्यायालयीन संघर्ष’, ‘दक्षिण भारत की समस्याओं  का वर्तमान परिदृश्य’ आदि विविधांगी विषयों पर इस अधिवेशन में विचारमंथन किया गया । समूहचर्चा के माध्यम से व्यापक विचारमंथन किया गया ।

रखें । आगामी चुनावों में जो हिन्दू राष्ट्र का कार्य करेगा, वही देश पर राज करेगा, यह हिन्दुत्वनिष्ठों की मांग होगी ।

 

अधिवेशन में सुनिश्‍चित की गई समान कार्ययोजना !

  1. 297स्थानों पर छोटी,मध्यम तथा बडी धर्मजागृति सभाएं, साथ ही एकवक्ता सभा का आयोजन किया जाएगा !
  2. 85नए स्थानों पर प्रतिमास राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन आरंभ किए जाएंगे!
  3. 69स्थानों पर हिन्दू राष्ट्र संगठक प्रशिक्षण कार्यशाला,हिन्दू राष्ट्र पर 84 विचारगोष्ठीयों का आयोजन होगा !
  4. 965स्थानों पर ग्रामस्तरीय हिन्दू राष्ट्र-जागृति बैठकें की जाएंगी!
  5. धर्मप्रेमी युवकों को धर्मशिक्षा देने हेतु नए270 स्थानों पर साप्ताहिक धर्मशिक्षावर्गों का आयोजन किया जाएगा!
  6. देशभर में26 जिलास्तरीय, तो 10 प्रांतीय तथा 3 राज्यस्तरीय हिन्दू अधिवेशन लेना सुनिश्‍चित हुआ!
  7. 209स्थानों पर शौर्य जागरण शिविर, 38स्थानों पर वक्ता प्रशिक्षण कार्यशालाएं, 89 स्थानों पर सोशल मीडिया शिविर, तो 60 स्थानों पर साधना शिविर सुनिश्‍चित हुआ !
  8. धर्मशिक्षा,कश्मीरी हिन्दुओं  पर हुए अत्याचार आदि विषयों पर आधारित 577 स्थानों पर प्रदर्शनियों का आयोजन !

इस प्रकार से योजनाबद्ध तथा नि:स्वार्थ वृत्ति के साथ किए गए संगठित कार्य से ही हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होगी तथा यही कार्य हमें कल्याणकारी भविष्य की ओर ले जाएगा । संक्षेप में कहा जाए, तो केवल हिन्दू राष्ट्र ही भारत का उद्धार करेगा, इसके प्रति आश्‍वस्त रहें !

सुन्दर कुमार ( प्रधान सम्पादक )

Mysticpowernews

मिस्टिक पावर (dharmik news) एक प्रयास है धार्मिक पत्रकारिता(religious stories) में ,जिसे आगे अनेक लक्ष्य प्राप्त करने हैं सर्वप्रथम पत्रिका फिर वेब न्यूज़ और अगला लक्ष्य सेटेलाइट चैनेल ............जिसके द्वारा सनातन संस्कृति(hindu dharm,sanatan dharma) का प्रसार किया जा सके और देश विदेश के सभी विद्वानों को एक मंच दिए जा सके | राष्ट्रीय और धार्मिक समस्याओं(hindu facts,hindu mythology) का विश्लेषण और उपाय करने का एक समग्र प्रयास किया जा सके |

Mysticpowernews has 574 posts and counting. See all posts by Mysticpowernews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *