*भगवान् श्रीराम और भारत का गलत इतिहास*

भगवान् श्रीराम और भारत का गलत इतिहास

श्रीराम कथाकी व्यापकता को देखकर पाश्चात्य विद्वानोंने रामायण को ई पू ३०० से १०० ई पू की रचना कहकर काल्पनिक

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जानिये न्यासःपरिचय और प्रयोग

जानिये न्यासःपरिचय और प्रयोग

साधना जगत में संकल्प और विनियोग के बाद बात आती है न्यास की;तत्पश्चात् ही ध्यान,पटल, कवच, स्तोत्र,हृदयादि-पाठ-जपादि का विधान है।

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एक ऋषि का जन्म-जैसा मैने देखा

एक ऋषि का जन्म-जैसा मैने देखा

परमपिता परमात्मा की विचित्रता से युक्त, अद्भुत और विलक्षण सृष्टि का उद्घाटन पूज्यपाद गुरुदेव शृङ्गी ऋषि कृष्णदत्त जी महाराज के

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अक्षयवट : एक अनमोल धरोहर

अक्षयवट : एक अनमोल धरोहर

सृष्टि संकल्प की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए जब पारब्रह्म परमेश्वर ने अपनी शक्ति सत्ता को वैसे ही

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जानिये सत्संग किसे कहते हैं ?

जानिये सत्संग किसे कहते हैं ?

आपके जीवन में भगवान का संग हो, ईश्वर के साथ आसक्ति हो ! आप को मालूम हो या ना हो

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जानिये वास्तु - भूमि परीक्षण और शकुन

जानिये वास्तु – भूमि परीक्षण और शकुन

जिस भूमिमें बहुतसे गढे हों उसमें जलकी प्यास और कच्छपके समान भूमिमें धनका नाश होता है । इसमे अनन्तर भूमिकी

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ध्यान-साधना की कसौटी

ध्यान-साधना की कसौटी

ध्यान अध्यात्म पथ का प्रदीप है। ध्यान की ज्योति जिसमें जितनी प्रखर है, अध्यात्म पथ उसमें उतना ही प्रकाशित हो

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आध्यात्मिक स्तर की सहायता ही सच्ची सहायता !

आध्यात्मिक स्तर की सहायता ही सच्ची सहायता !

आजकल समाजसेवा के क्षेत्र में अध्यात्म तथा धर्म के विषय में संवेदनशील रहकर उनका समावेश करने का झुकाव बढ रहा

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गीता दर्शन

गीता दर्शन

प्रपन्नपारिजाताय तोत्रवेत्रैकपाणये। ज्ञानमुद्राय कृष्णाय गीतामृतदुहे नमः।। सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपालनन्दनः। पार्थो वत्सः सुधीर्भोक्ता दुग्धं गीतामृतं महत्।। गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यैः

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