ज्योतिष में देश काल की माप

श्री अरुण कुमार उपाध्याय (धर्मज्ञ) १. सभ्यता का आधार वेद-वेदा हि यज्ञार्थमभिप्रवृत्ताः कालानुपूर्व्या विहिताश्च यज्ञाः। तस्मादिदं कालविधानशास्त्रं, यो ज्योतिषं वेद

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जोधपुर में लिखा गया था अन्तिम ”स्मृतिग्रन्थ”

भारतीय ज्ञान वेद, स्मृतियों व पुराणों में संकलित व सुरक्षित है इसीलिये इन्हें धर्मशास्त्र कहा गया है। वेद किसी की

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वेद से लिपि का उद्भव तथा वर्गीकरण

अरुण कुमार उपाध्याय (धर्मज्ञ) १. लिपि नहीं होने का प्रचार – रघुवंश (२/२) की एक प्रसिद्ध उक्ति है-श्रुतेरिवार्थं स्मृतिरन्वगच्छत्। अर्थात्

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मूर्त्ति पूजा मण्डनम् व पुराण स्थापना

डॉ. दिलीप कुमार नाथाणी- झूठार्थ तम भंजनम्-आदि सनातन परम्परा व संस्कृति अनुपालक जो वेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद्, स्मृतियाँ, पुराण व

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हिन्दू धर्म पर ‘बॉलीवुड’ का षड्यंत्र !

सुन्दर कुमार (संपादक)- ‘पीके’ समान फिल्में अथवा ‘पाताललोक’ जैसी वेबसिरीज के माध्यम से हिन्दू धर्म पर सुनियोजित ढंग से आघात

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धन्वन्तरि तथा सुश्रुत परम्परा

अरुण कुमार उपाध्याय(धर्मज्ञ) (१) समुद्र मन्थन (१६,००० ई.पू) में देवासुर संगाम के अवसर पर प्रथम धन्वन्तरि हुए। उनकी जयन्ती धन-त्रयोदशी

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महामृत्युञ्जय मन्त्र

१. मूल मन्त्र- ऋषि-वसिष्ठ मैत्रावरुणि, छन्द अनुष्टुप्, देवता-रुद्र (मृत्यु विमोचनी ऋक्) त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीयमामृतात्॥ (ऋक्, ७/५९/१२, वाज.

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तन्त्र सिद्धान्त

अरुण कुमार उपाध्याय (धर्मज्ञ) १. आगम-सनातन साहित्य को आगम कहा गया है। आगम का एक अर्थ है आरम्भ से वर्तमान।

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