नाथसिद्ध अमृतनाथ जी महाराज

सिद्ध अमृतनाथ जी महाराज नाथपंन्थ में दीक्षित योग सिद्ध पुरुष थे उन्होने राजस्थान प्रदेश के बीकानेर, फतेहपुर, शेखावाटी क्षेत्र के

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ब्राह्मण कौन-वज्रसुचिकोपनिषद

बासुदेव मिश्रा-यह उपनिषद सामवेद से सम्बद्ध है ! इसमें कुल ९ मंत्र हैं ! सर्वप्रथम चारों वर्णों में से ब्राह्मण

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तत्काल कृपामूर्ति- भगवान

डॉ. दीनदयाल मणि त्रिपाठी (प्रबंध संपादक) दत्तात्रेय शीघ्र कृपा करने वाले देव की साक्षात मूर्ति कहे जाते हैं। अत्रि ऋषि

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कृष्ण तत्त्व

अरुण कुमार उपाध्याय (धर्मज्ञ) वंशी-विभूषितकरात् नवनीरदाभात् पीताम्बरात् अरुणबिम्बफलाधरोष्ठात्। पूर्णेन्दु-सुन्दरमुखात् अरविन्द-नेत्रात् कृष्णात् परं किमपि तत्त्वमहं न जाने॥ (गूढार्थदीपिका, मधुसूदन सरस्वती) स्वयं

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परम पुरुष राम

अरुण कुमार उपाध्याय (धर्मज्ञ) १. पुरुष-प्रकृति रूप- सीय-राम मय सब जग जानी। करऊं प्रणाम जोरि जुग पानी॥ (रामचरितमानस, बालकाण्ड, १/७/२)

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जानिए श्रीराम भक्त हनुमान जी को

श्रीहनुमानजी का चरित्र सेवा और आत्मसमर्पण का प्रत्यक्ष रूप हैं। वाल्मिकी रामायण के अनुशीलन से जान पडता हैं कि हनुमानजी

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असाधारण पराक्रमी झांसीकी रानी लक्ष्मीबाई

-श्री सुरेश मुंजाल – हिन्दू जनजागृती समिति जन्म तथा बाल्यावस्था दूसरे बाजीराव पेशवा के बंधु चिमाजी अप्पा के व्यवस्थापक मोरोपंत

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स्वातंत्र्यवीर सावरकर जयंती पर विशेष।

श्री सुरेश मुंजाल (हिंदू जनजागृति समिति) भारत को स्वातंत्र्य दिलवाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई भारतमाता के वीर सुपुत्र क्रांतीकारियों ने

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हयग्रीव अवतार महात्म्य

-श्री अरुण उपाध्याय (धर्मज्ञ)- १. महाभारत कथा-महाभारत, शान्तिपर्व, अध्याय ३४७ के अनुसार विराट् सृष्टि (पिण्ड एवं उनके अधिष्ठान) अनिरुद्ध रूप

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