जीवन के संदेहों का निवारण

जीवन के संदेहों का निवारण

शोकस्थान सहस्राणि हर्ष स्थानि शतानि च | दिवसे दिवसे मूढ़माविशन्ति न पंडितम || अर्थात – मूर्ख मनुष्य को ही प्रतिदिन

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