ज्ञान मुद्रा तथा भद्रा मुद्रा का रहस्य

ज्ञान मुद्रा तथा भद्रा मुद्रा का रहस्य

“श्लोकार्धेन प्रवक्ष्यामीमि, यदुक्तं ग्रंथकोटिभिः । ब्रह्म सत्यं जगन्मित्थ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः ।। करोड़ों ग्रंथों में जो विस्तार से कहा गया

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