वेद से लिपि का उद्भव तथा वर्गीकरण

अरुण कुमार उपाध्याय (धर्मज्ञ) १. लिपि नहीं होने का प्रचार – रघुवंश (२/२) की एक प्रसिद्ध उक्ति है-श्रुतेरिवार्थं स्मृतिरन्वगच्छत्। अर्थात्

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