योग दर्शन ,महत्त्व एवं जीवन विकास

योग दर्शन ,महत्त्व एवं जीवन विकास

योग का वर्णन वेदों में, फिर उपनिषदों में और फिर गीता में मिलता है, लेकिन पतंजलि और गुरु गोरखनाथ ने

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