रुढि वाद और रीवाज कब तक शास्त्रसम्मत है ?

महर्षि पारस्कर आदि कहते हैं –”ग्रामवचनं च कुर्युः”-।। 11।। “विवाहश्मशानयोर्ग्रामं प्राविशतादिति वचनात् ‘।।12।।“तस्मात्तयोर्ग्रामः प्रमाणमिति श्रुतेः ।।1—–प्रथमकाण्ड, अष्टमी कण्डिका । पारस्करगृह्यसूत्र”

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