परम पुरुष राम

अरुण कुमार उपाध्याय (धर्मज्ञ) १. पुरुष-प्रकृति रूप- सीय-राम मय सब जग जानी। करऊं प्रणाम जोरि जुग पानी॥ (रामचरितमानस, बालकाण्ड, १/७/२)

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